जल ही जीवन है Essay on water

जल ही जीवन है

जल ही जीवन है

क्या आप बिना जल के जीवित रह सकते हो कल्पना करो कि आपको प्यास लगी है खाने के लिए सब कुछ है अच्छे अच्छे व्यंजन पूड़ी पकवान मिठाई इत्यादि लेकिन सिर्फ पानी ही नहीं है तब क्या ये सारे व्यंजन आपको अच्छे लगेंगे नहीं आपको कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा। मनुष्य पेड़ पौधे जीव जन्तु सभी को पानी सबसे पहली जरूरत है। मनुष्य भूखा तो कई दिनों तक रह सकता है लेकिन जल के बिना एक भी दिन काटना मुश्किल हो जाता है। इसलिए कहा गया है कि जल ही जीवन है। जल ही जीवन है Essay on water

              लेकिन क्या हम जल के महत्व को समझ रहे है ? क्या किसी ने सोचा है कि जब पृथ्वी पर पीने का पानी नहीं होगा तो क्या होगा ? बहुत से लोग जल के महत्व को समझते हुए भी इसे बर्बाद करते है। आजकल हर घर में सबमर्सिबल पंप है जो कि जरा सी देर में ढेर सारा पानी पृथ्वी से खींचती है। जब हम अपने घरों के पानी के टैंक को भरते है। तब खासकर टैंक भर जाता है उसके बाद भी कितना पानी बर्बाद होता है।

             गांव के लोग तो अपने पालतू जानवरों को नहलाने के लिए सबमर्सिबल का ही उपयोग करते है भले ही कितना ही पानी व्यर्थ क्यों न हो जाये लेकिन वे लोग अपनी गाय भैंस को सबमर्सिबल पंप पर पाइप से ही नहलाते है। लकिन अगर किसी पडोसी ने बोल दिया कि पानी क्यों बर्बाद कर रहे हो तब वे लोग जल के महत्व को समझने के बजाय झगड़ा शुरू कर देते है गांव ही नहीं बड़े बड़े शहरों में भी पढ़े लिखे लोग भी जल संरक्षण की तरफ ध्यान नहीं देते है।जल ही जीवन है Essay on water

जल का महत्व –  वे लोग जल के महत्व को नहीं जानते जिनको आसानी से जल प्राप्त हो रहा है। पानी का सही मोल तो वह इंसान समझता है जो कई किलोमीटर चल कर जाता है और कुल एक दो मटका पानी ही मिलता है। हमारे देश की जनसँख्या आसमान छू रही है। दुनियां में जनसँख्या के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है जितने अधिक लोग होंगे उतना ही अधिक पानी चाहिए मतलब जितने अधिक लोग पानी का खर्चा भी उतना ही अधिक होगा। देश के कुछ राज्यों को तो डार्क जोन की केटेगरी में रखा गया है। अगर सभी लोग इसी तरह पानी बर्बाद करते रहे तो उन राज्यों में भूमिगत पानी खत्म हो जायेगा। 

                  पृथ्वी का लगभग 3 चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है, किन्तु इसमें से 97% पानी खारा है जो पीने योग्य नहीं है। पीने योग्य पानी की मात्रा केवल 3% ही है। इसमें भी 2% पानी ग्लेशियर बर्फ के रूप में है। इस तरह सारे जल का मात्र 1% भाग ही हमारे उपयोग का है। इसलिए वैज्ञानिक समुद्र के जल को पीने योग्य बनाने के लिए रोजाना नए नए प्रयोग कर रहे है। जल के बिना इस धरती पर कोई भी मनुष्य, जीव जंतु या फिर पेड़ पौधे कुछ भी जीवित नहीं रह सकते।

जल  के स्त्रोत – जल हमें कई जगह से प्राप्त होता है। समुद्र भी जल का भण्डार है लेकिन वह पीने योग्य नहीं है। पानी का मुख्य स्त्रोत वर्षा है। वर्षा का पानी ही जल की पूर्ति करता है। इसके अलावा पहाड़ों पर जमने वाली बर्फ पिघल कर पानी बनती है और नदियों में मिलता है। हम पीने के लिए पानी कुआ, नलकूप, सबमर्सिबल पंप आदि के द्वारा पृथ्वी से पानी प्राप्त करते है। 

जल का प्रयोग – इस पृथ्वी पर जितने भी सजीव प्राणी है सभी को पानी की जरूरत है। बिना जल के मानव 3 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता। इस लिए जल ही जीवन है यह कथन गलत नहीं है।
  • घरेलू कार्यों में – मानव जाति को पीने के लिए, खाना बनाने के लिए, साफ सफाई जैसे दैनिक कार्यों में पानी की ही जरूरत होती है। जानवरों को पिलाने व नहलाने के लिए भी जल की जरूरत होती है। 
  • कृषि कार्यों में – खेतों की सिचाई के लिए भी पानी की जरूरत होती है बिना पानी के कोई भी फसल नहीं हो सकती। फसल को अधिक ठण्ड से बचाने के लिए किसान अपनी फसल में पानी लगाते है। 
  • उद्योगों धंधों में – विभिन्न उद्योगों  जैसे सूती वस्त्र उद्योगों में जल का उपयोग रेशों को साफ करने के लिए किया जाता है। बिना जल के कोई भी कल कारखाने नहीं चल सकते हैं। जल का उपयोग विधुत के निर्माण में भी होता हैं। 

जल संरक्षण किस प्रकार करें –  जल संरक्षण करने के लिए हम कुछ प्रयास कर सकते हैं:-

  • जब हम अपने घर का पानी का टैंक भरें तो सबमर्सिबल पंप के टैंक को थोड़ा खाली रहे तभी बंद कर दें। 
  • जरूरत से ज्यादा पानी खर्च न करें। 
  • अगर गिलास में पानी बचा हैं तो उसे फेंकें नहीं बल्कि पौधे में डाल दें।
  • अपनी गाड़ी, मोटर साइकिल, दुकान पर साफ कराने के बजाय अपने घर पर कम पानी में ही अपने वाहन को साफ करें। क्योंकि दुकान पर वे लोग अधिक पानी बर्बाद करते हैं। 
  • पीने के लिए गिलास में उतना ही पानी लें जितना पी सकें। 
  • कहीं भी नल अगर खुला दिखे तो तुरंत नल को बंद कर दें।
  • घर में अगर R.O. Water प्यूरीफाई मशीन हैं तो उसमें जो पानी व्यर्थ निकलता हैं उसे फेंकने के बजाय उससे साग सब्जी धोएं तथा सब्जी धोने के बाद जो पानी हम फेकते हैं उसे फेकें नहीं अपने बगीचे के पौधों में डाल दें। 

विश्व जल दिवस – विश्व जल संरक्षण दिवस 22 मार्च को मनाया जाता हैं शुरूआत में इसका मुख्य विषय पानी का महत्व था। सन 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण विकास की बैठक में स्वच्छ जल हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। जो कि 22 मार्च 1993 को पहला विश्व जल दिवस मनाया गया था। 

निष्कर्ष – जल को जीवन के समान समझकर हमें उसका संरक्षण करना होगा और अधिक से अधिक जल का संचय करना होगा । अधिक वर्षा हो इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे। ज्यादा वर्षा होगी तो भूमिगत जल की वृद्धि होगी।

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4 thoughts on “जल ही जीवन है Essay on water”

  1. Water is life. I feel very bad when people waste water unnecessarily.isliye water ko save karna sabse pahle apne ap se start karna hoga।

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