जीवन दायिनी ऑक्सीजन

जीवन दायिनी ऑक्सीजन जीवन दायिनी ऑक्सीजन जीवन दायिनी ऑक्सीजन

क्‍या आपने कभी ये सोचने की कोशिश की है कि जब इतनी गैस पर्यावरण में मौजूद हैं तो फिर सांस लेने और जिंदा रहने के लिए सिर्फ ऑक्‍सीजन ही क्‍यों चाहिए। एक रिसर्च में कुछ साल पहले वैज्ञानिकों ने इस बात का पता लगाया था। इसके साथ ही उन्‍होंने इस बात पर भी रिसर्च की थी कि क्‍या ऑक्‍सीजन का कोई और विकल्‍प आने वाले दिनों में तलाशा जा सकता है।

Oxygen

ऑक्सीजन क्या है?

ऑक्सीजन तत्व आवर्त सारणी में रासायनिक प्रतीक O के साथ मौजूद है । यह पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। वास्तव में, ऑक्सीजन के बिना, अधिकांश जीवन जीवित नहीं रह पाएगा। आज, यह वायुमंडल का लगभग 21% बनाता है, लेकिन 2.4 अरब साल पहले ग्रह बहुत अलग था। पृथ्वी पर प्रारंभिक जीवन ऑक्सीजन का उपयोग नहीं करता था, लेकिन अंततः प्रकाश संश्लेषण नामक प्रक्रिया के माध्यम से सूर्य को ऊर्जा के रूप में उपयोग करने के लिए विकसित हुआ । प्रकाश संश्लेषण के दौरान, ऑक्सीजन अपशिष्ट उत्पाद के रूप में बनता है। लाखों वर्षों में, इन प्रकाश संश्लेषक रोगाणुओं ने इतनी ऑक्सीजन छोड़ी कि वह वायुमंडल में एकत्रित होने लगी। इससे अंततः वायुमंडल में ओजोन (O3) परत और आणविक ऑक्सीजन (O2 ) का निर्माण हुआ । ऑक्सीजन का परमाणु भार/द्रव्यमान 15.999U है।

ऑक्सीजन की खोज-

ऑक्सीजन या प्राणवायु रंगहीन, स्वादहीन तथा गंधहीन गैस है। इसकी खोज, प्राप्ति अथवा प्रारम्भिक अध्ययन में जे॰ प्रीस्टले और सी॰डब्ल्यू॰ शेले ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह एक रासायनिक तत्त्व है। सन् 1772 ई॰ में कार्ल शीले ने पोटैशियम नाइट्रेट को गर्म करके आक्सीजन गैस तैयार किया, किन्तु उनका यह कार्य सन् 1777 ई॰ में प्रकाशित हुआ। सन् 1774 ई॰ में जोसेफ प्रिस्टले ने मर्क्युरिक-ऑक्साइड को गर्म करके ऑक्सीजन गैस तैयार किया। एन्टोनी लैवोइजियर ने इस गैस के गुणों का वर्णन किया तथा इसका नाम आक्सीजन रखा, जिसका अर्थ है – ‘अम्ल उत्पादक’।

ऑक्सीजन का महत्व

ऑक्सीजन तरल और गैस दोनों अवस्था में पाई जाती है। यह पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों के लिए बहुत ही आवश्यक है। ऑक्सीजन का प्रयोग मनुष्य के शरीर में मौजूद खतरनाक बीमारी कैंसर के इलाज में भी किया जाता है। ऑक्सीजन से कैंसर कोशिकाओं को मारा जाता है, इसके अलावा ऑक्सीजन का तरल रूप थेरेपी करने में उपयोग किया जाता है।

मनुष्य के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा-

शरीर में ऑक्सीजन का लगभग 99% होना चाहिए, यह 96% से कम या घटता हैं, तो उस व्यक्ति को हाइपोक्सिया का शिकार होने का डर बना रहता है। फेफड़ों के रोग होने पर सबसे पहले ऑक्सीजन का स्तर घटता है।

ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए हमें कौन से पेड़ लगाना चाहिए-

पीपल का पेड़-

पीपल का पेड़ 60 से 80 फीट तक लंबा हो सकता है। पीपल ही ऐसा पेड़ है जो 24 घंटे ऑक्सीजन देता है। यह पेड़ सबसे ज्‍यादा ऑक्‍सीजन देता है। एक साल में 100 किलो ऑक्सीजन छोड़ता है पीपल। इसलिए पर्यावरणविद पीपल का पेड़ लगाने के लिए बार-बार कहते हैं।

Ficus religiosa

बरगद का पेड़-

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष होने साथ ही इस वृक्ष को हिन्दू धर्म में बहुत पवित्र भी माना जाता है। धार्मिक आस्थाओं के साथ-साथ यह वृक्ष पर्यावरण के संरक्षण और उसको साफ सुथरा बनाए रखने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बरगद के पेड़ और इसकी पत्तियों में कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने की सबसे ज्यादा क्षमता होती है। पीपल के सामान ही यह वृक्ष भी बहुत अधिक मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं। इसलिए बरगद का वृक्ष भी पर्यावरण के लिए किसी वरदान से कम नहीं।

Banyan Tree

नीम का पेड़-

नीम के पेड़ में संक्रमण का खात्मा करने के गुण मौजूद हैं। एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर नीम का वृक्ष दूषित वायुमंडल को शुद्ध कर स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करता है। इसकी पत्तियों की बनावट ऐसी होती है कि नीम का एक स्वस्थ बड़ा पेड़ बहुत अधिक मात्रा में ऑक्सीजन उत्पादित कर सकता है। इसलिए हमेशा ज्यादा से ज्यादा नीम के पेड़ लगाने की सलाह दी जाती है, इससे आसपास की हवा हमेशा शुद्ध रहती है।बीमारियों को दूर रखने वाले नीम के पेड़ को एवरग्रीन ट्री भी कहा जाता है। पर्यावरणविदों की मानें तो यह पेड़ एक नैचुरल एयर प्यूरीफायर है जो प्रदूषित गैसों जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन को हवा से सोख कर पर्यावरण में ऑक्सीजन को छोड़ता है।

Neem Tree

बांस का पेड़-

पर्यावरण के लिहाज से अनुकूल बांस सबसे तेज बढ़ने वाला पेड़ या घास है। यह पर्यावरण संरक्षण में भी काफी अहम भूमिका निभाता है। बांस ऐसा पौधा है जिसकी पत्तियां ही नहीं बल्कि तना भी आक्सीजन देता है। बांस का पेड़ हवा को फ्रेश करने के काम में भी आता है। माना जाता है कि बांस का पेड़ अन्य पेड़ों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है।

Bamboo Tree

प्रकृति विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से ऑक्सीजन गैस का स्तर बढ़ाती है-

1. पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण-

प्रकाश संश्लेषण के दौरान, पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसे ऑक्सीजन और ग्लूकोज में परिवर्तित करने के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हैं। यह प्रक्रिया प्रकृति में ऑक्सीजन उत्पादन का प्राथमिक स्रोत है।

2. शैवाल और सायनोबैक्टीरिया –

शैवाल और सायनोबैक्टीरिया भी प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से ऑक्सीजन उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वे अक्सर महासागरों, झीलों और नदियों जैसे जल निकायों में पाए जाते हैं।

3. वन संरक्षण-

वनों की सुरक्षा और संरक्षण के साथ-साथ वनीकरण को बढ़ावा देने से ऑक्सीजन उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। जैव विविधता को बनाए रखने, पुनर्वनीकरण को बढ़ावा देने और जल संसाधनों के प्रबंधन सहित उचित वन प्रबंधन, ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में योगदान कर सकता है।

4. प्रदूषण नियंत्रण-

वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक गैसों और अपशिष्ट निपटान जैसे प्रदूषण को नियंत्रित करने से प्रकृति में ऑक्सीजन का स्वस्थ संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। प्रदूषण कम होने से स्वस्थ वातावरण बनता है और प्राकृतिक ऑक्सीजन उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। इन उपायों को लागू करके, ऑक्सीजन का प्राकृतिक उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, जो एक स्थायी पर्यावरण बनाए रखने और मानव स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।

दोस्तों आपको यह जानकरी Helpful लगी हो तो अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में अवश्य दें। इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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