बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर हिंदी निबंध
जैसा कि हम जानते है कि भारत देश एक कृषि प्रधान देश होने के साथ – साथ पुरुष प्रधान देश भी है। शुरुआत से ही लड़कियों को दबाने की सोच ही विकसित हुई है , जो समय के साथ धीरे – धीरे कम भी हुई है । अब हर जगह महिलाओं को समान अधिकार दिये गए है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एक अभियान नहीं अपितु लोगों के दिल में बसी छोटी सोच को मिटाना भी है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या है? इस योजना के मुख्य घटकों में शामिल हैं प्रथम चरण में PC तथा PNDT Act को लागू करना , राष्ट्रव्यापी जागरूकता और प्रचार अभियान चलाना तथा चुने गए 100 जिलों ( जहां शिशु लिंग अनुपात कम है ) में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कार्य करना । बुनियादी स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण देकर , संवेदनशील और जागरूक बनाकर तथा सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से उनकी सोच को बदलने पर जोर दिया जा रहा है । एनडीए सरकार कन्या शिशु के प्रति समाज के नजरिए में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का प्रयास कर रही है । प्रधान मंत्री मोदी ने अपने मन की बात में हरियाणा के बीबीपुर के एक सरपंच की तारीफ की जिसने ‘ Selfie With Daughter ‘ पहल की शुरूआत की । प्रधान मंत्री ने लोगों से बेटियों के साथ अपनी सेल्फी भेजने का अनुरोध भी किया और जल्द ही यह विश्व भर में हिट हो गया । भारत और दुनिया के कई देशों के लोगों ने बेटियों के साथ अपनी सेल्फी भेजी और यह उन सबके लिए एक गर्व का अवसर बन गया जिनकी बेटियां हैं।
बालिका बचाओ आंदोलन की आवश्यकता क्यों है ? महिलाओं और पुरुषों दोनों की समान भागीदारी के बिना पृथ्वी पर मानव जीवन का अस्तित्व असंभव है । वे पृथ्वी पर मानव जाति के अस्तित्व के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं । वे एक राष्ट्र के विकास और विकास के लिए भी उत्तरदायी हैं । हालांकि , महिला का अस्तित्व पुरुषों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है । क्योंकि उसके बिना हम अपने अस्तित्व के बारे में नहीं सोच सकते । इसलिए , मनुष्यों को विलुप्त होने से बचाने के लिए हमें बालिकाओं को बचाने के उपाय करने होंगे ।
हमारे समाज में विभिन्न बुराई है- जिनमें से एक लड़का होने की इच्छा होना है । भारतीय समाज में , हर कोई एक आदर्श माँ , बहन , पत्नी और बेटी चाहता है। यह भारत में एक आम बात है जहां लोग जन्म के समय बालिकाओं का गर्भपात या हत्या करते हैं । लेकिन , उन्हें समान अवसर, सम्मान और जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए । इसके अलावा , सभ्यता का भाग्य उनके हाथ में है क्योंकि वे हमारी रचना का मूल हैं।

बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य-
*बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य समाज में महिलाओं की खराब स्थिति को अच्छा करना है।
*देशभर में घट रही महिलाओं की जनसंख्या को संतुलित करना।
*इस अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है , उन्हें अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि आगे चलकर महिलाएं खुद के ऊपर निर्भर रहे समाज उनका गलत फायदा ना उठाएं।
*बेटियां पढेगी तब वह अपने खिलाफ हो रहे बुराइयों का जवाब दे पाएगी , उसका सामना कर पाएगी। इसीलिए इस अभियान का उद्देश्य है कि हर बालिका को उच्च से उच्च शिक्षा मिले और उसे सपनों के आसमान में उड़ने के लिए पर मिले।
*समाज में बेटियों की खराब स्थिति को अच्छा किया जा सके और लोगों को अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
*इस योजना का उद्देश्य समाज में महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव और सेक्स डिटरमिनेशन टेस्ट को रोकना है।
यह भी पढ़ें – 1. कन्या भ्रूण हत्या 2. महिला सशक्तिकरण essay on women empowerment
बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ अभियान का शुभारंभ- बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना का अर्थ है कन्या शिशु को बचाइए और इन्हें शिक्षित कीजिए । हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015 को बालिका दिवस के मौके पर इस योजना की शुरुआत की । जिससे समाज में बेटियों को उनके अधिकार मिल सकें ।
इस योजना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रूपए का बजट तय किया है । इस योजना की शुरुआत के समय नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि ” हम भारतीयों को घर में कन्या की जन्म को एक उत्सव की तरह मनाना चाहिए । हमें अपने बच्चियों पर गर्व करना चाहिए। भारत में 2001 की जनगणना में 0-6 वर्ष के बच्चों का लिंग अनुपात का आंकड़ा 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 927 थी । जो कि 2010 की जनगणना में घटकर 1000 लड़कों के अनुपात में 918 लड़कियां हो गई । ये एक चिंता का विषय है इसलिए सरकार को ये योजना शुरू करने की आवश्यकता महसूस हुई।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर कौन है ?
दोस्तों बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेस्डर हमारे देश की रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक को बनाया गया है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के लाभ-
*यह योजना बालिकाओं को बचाने , और उनके माता – पिता को उन्हें शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत प्रयास कर रही है।
*यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने, बालिका सुरक्षा और लड़कियों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है ।
*बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना के तहत, सुकन्या समृद्धि खाता नामक एक बचत योजना शुरू की गई है। यह खाता बालिकाओं के लिए विशिष्ट है, जहाँ बच्चे के माता – पिता या अभिभावक अपनी बेटियों के लिए धन बचा सकते हैं, जिसका उपयोग बालिका की शिक्षा या विवाह के लिए किया जा सकता है। इस खाते से कोई कर कटौती नहीं होगी।
*सरकारी स्कूलों में लड़कियों की कोई स्कूल फीस नहीं है। कुछ निजी स्कूल बालिकाओं को छूट भी प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष- लड़की को बचाने के लिए पहला कदम हमारे अपने घर से शुरू होना चाहिए। हमें अपने परिवार के सदस्यों , पड़ोसी , दोस्तों और रिश्तेदारों को उन्हें बचाने और अन्य लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए । साथ ही , हमें अपने परिवार के सदस्यों को एक लड़के के बजाय एक लड़की होने के लिए खुश होना चाहिए।
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