महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में
देवो के देव महादेव, त्रिनेत्र जिनके क्रोध के आगे कोई नहीं टिक सकता, ऐसे है महादेव शिव शंकर। हमारे देश भारत मे कई त्योहार बहुत ही उत्साह के साथ मनाये जाते है। जैसे- दीपावली, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि और महाशिवरात्रि। महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में
प्रस्तावना- महाशिवरात्रि का त्योहार हमारे देश मे बहुत महत्व है। इस दिन की पूजा अर्चना सुबह से लेकर शाम तक चलती है। परंतु शिवरात्रि की पूजा रात में ही महोत्सव की तरह की जाती है। शिव + रात्री अर्थात शिव जी की रात। इस दिन शिव जी का जन्म हुआ था। हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में
जगत में रहते हुए मुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि। इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों, पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। शिव की साधना से धन-धान्य, सुख- सौभाग्य, और समृद्धि की कमी कभी नहीं होती। भक्ति और भाव से अपने लिए विनती तो करनी ही चाहिए साथ ही जगत के कल्याण के लिए भगवान आशुतोष की आराधना करनी चाहिए।

कैसे पड़ा महाशिवरात्रि का नाम- शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव जंतुओं के स्वामी एवं अधिनायक हैं। ये सभी जीव – जंतु, कीट – पतंग भगवान शिव की इच्छा से ही सब प्रकार के कार्य तथा व्यवहार किया करते हैं। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव वर्ष में 6 मास कैलाश पर्वत पर रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। उनके साथ ही सभी कीड़े – मकौड़े भी अपने बिलों में बंद हो जाते हैं।
उसके बाद 6 मास तक कैलाश पर्वत से उतरकर धरती पर श्मशान घाट में निवास किया करते हैं। इनके धरती पर अवतरण प्राय: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ करता है। अवतरण का यह महान दिन शिवभक्तों में ‘ महाशिवरात्रि ‘ के नाम से जाना जाता है। महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में
कब मनायी जाती है महाशिवरात्रि? हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को, हर सोमवार को, प्रदोष व्रत आता है। फाल्गुन महीने की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। जिसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन शिव जी की पूजा का अत्यधिक महत्व है। माना जाता है कि कुँवारी कन्या अगर इस दीन शिव जी की पूजा अर्चना करती है, तो उन्हें शिव जी जैसा एक अच्छा और आदर्श वादी जीवन साथी की प्राप्ति होती है। परंतु इस दिन भगवान शिव की पूजा का महत्व सभी के लिए उत्साहवर्धक होता है। हर जगह हर हर महादेव की गूंज सुनाई देती है।
कैसे की जाती है महाशिवरात्रि पूजा? सुबह प्रातः काल उठ कर स्नान किया जाता है, और कई लोग तो इस दिन स्नान आदि के लिए गंगा जी मे डुबकी भी लगाने के लिए जाते है। परंतु आमतौर पर स्नान करते वक्त अपने पानी मे बहुत से लोग इस दिन काले तिल डाल कर स्नान करते है। शिव जी की पूजा का प्रारंभ शिव जी का अभिषेक करके किया जाता है। फिर दूध, जल, चंदन, घी, दही, शहद, फूल, फल और बेलपत्र का तो विशेष महत्व रहता है। महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में
इस दिन शिव जी की उपासना में यदि चारो पहर की पूजा करते है, तो पहले पहर में पानी, दूसरे पहर में घी, तीसरे पहर में दही और चौथे पहर में शहद का प्रयोग करना उचित माना जाता है। शिव जी की पूजा में शिवलिंग पर जल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, बेर, पान का पत्ता चढ़ाने का विशेष महत्व है। ॐ नमः शिवाय का 108 बार जाप किया जाता है, और अगरबत्ती, धूपबत्ती आदि की सुगंध से मंदिर और घर को महकाया जाता है।
शिव जी की आरती की जाती है। इसके साथ ही शिव जी के 108 नाम का जाप किया जाता है। पूजा करने की विधि तो सभी को पता है, परंतु जरूरी नहीं कि सभी के पास सभी चीजें उपलब्ध हो, परंतु ये भी सत्य है कि भगवान इंसान की पूजा और श्रद्धा देखते है, भले ही उसके पास चढ़ाने को कुछ भी ना हो।
उपसंहार- वह महाशिवरात्रि है जिसका शिव तत्व से घनिष्ठ संबंध है। यह पर्व शिव के दिव्य अवतरण का मंगल सूचक पर्व है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। वह क्रोध, लोभ, मोह विकारों से मुक्त करके परम सुख, संपत्ति एवं ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति दयाभाव दिखाते हुए शिवजी की पूजा करते हैं, उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। वैसे भी भोलेनाथ शिवजी को जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में भी माना जाता है जिनका पूजन पूरे भारत देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
Very good keep it up
If you continue this you will became a good blogger.
Mam, please post a blog on Yogi Aditya Nath.
very good